Wednesday, August 10, 2011

अधिवक्ताओं ने जलाई लोकपाल बिल की प्रतियां...

Ballia News: बलिया। कलेक्ट्रेट परिसर में सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं ने लोकपाल का प्रस्तावित बिल जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि लोकपाल में केंद्र सरकार ने मनमाना रवैया अपनाते हुए बिल पारित कराने की दिशा में पहल की है जो लोकतंत्र के खिलाफ है। सिविल कोर्ट के एडवोकेट मनोज कुमार हंस के नेतृत्व में डीएम को राष्ट्रपति के नाम से संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कुछ दिन पूर्व ही अन्ना हजारे के बेमियादी अनशन के पश्चात जन लोकपाल विधेयक को तैयार करने के लिए सरकार के नुमाइंदे और सिविल सोसाइटी के सदस्यों के बीच एक संयुक्त सोसाइटी बनाई गई। साथ ही इनकी कुछ बैठके भी हुई लेकिन आम सहमति नहीं बन पाई। दो विधेयक तैयार हुए एक सरकार की और एक सिविल सोसाइटी की। ज्ञात हो कि सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद सिविल सोसाइटी का गठन हुआ था। ताकि जन लोकपाल पर एक मजबूत विधेयक तैयार किया जा सके। लेकिन मतभेदों के कारण ऐसा नहीं हो सका और दो-दो विधेयक तैयार हो गया। पत्रक में कहा गया है कि एक को सरकारी विधेयक और दूसरे को गैर सरकारी विधेयक के रूप में दोनों विधेयकों को आम जनता के सामने बहस के लिए सरकार को पेशकर लोगों की राय लेनी चाहिए। पत्रक में कहा गया है कि ऐसा नहीं करके सरकार लोकतंत्र का चीरहरण कर रही है। पत्रक में कहा गया है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है इसलिए आम जनता की राय का सम्मान करते हुए सिविल सोसाइटी के जन लोकपाल विधेयक बिल को पारित कर विश्व के लोकतंत्र के इतिहास में एक मिशाल पेश करना चाहिए। पत्रक में राष्ट्रपति से शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों विधेयकों पर आम जनता की राय लेने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की है। पत्रक देने वाले प्रतिनिधि मंडल में देवनाथ पांडेय एडवोकेट, पंकज श्रीवास्तव, देवनाथ पांडेय, शिवशरण श्रीवास्तव, बृज किशोर श्रीवास्तव, सुनील श्रीवास्तव, परविंद कुमार तिवारी रहे।


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